उलझन | Zindagi Ki Uljhan Hindi Kavita

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उलझन

 पापा कहते बनो डॉक्टर

 माँ कहती इंजीनियर

 भैया कहते इससे अच्छा सीखो  तुम कंप्यूटर

 चाचा कहते बनो प्रोफेसर

 चाची कहती अफसर

दीदी कहती आगे चलकर बनना तुम्हें कलेक्टर

 बाबा कहते फोज मे जाकर जग मे नाम कमाओ

दादी कहती घर में रहकर ही उघोग लगाओ

सबकी  अलग अलग अभिलाषा

सब का अपना अपना नाता

लेकिन मेरे मन की उलझन

कोई नहीं समझ पाता

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