DOHE KABIR DAS JI KE | दोहे कबीर दास जी – hindi kavita dohe



   

दोहे कबीर दास जी
 

       ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए, 

        ओरन को शीतल करे आपु  शीतल होय //




      बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर,

        पंथी को छाया नहीं फल लगे अति दूर//




      काल करे सो आज कर, आज करे सो अब,

        पल में प्रलय होएगी बहुरि करेगा कब//




      साईं इतना दीजिए जा मे कटुब  समाय,

        मैं भी भूखा ना रहूं,और साधु भी भूखा ना जाए//




      कबीरा तेरी झोपड़ी , गल कटियन के पास  ,

        करन गे  सो भरन गे ,तू क्यों भए  उदास //

WRITTEN BY:- KANCHAN KUMARI
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